
The live ink desk. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो इसके सामाजिक दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं और समाज में विभाजन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अदालत ने यूजीसी और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर मामले में अपना पक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने नियमों में प्रयुक्त भाषा पर चिंता जताते हुए टिप्पणी की कि इन प्रावधानों का दुरुपयोग किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश ने सवाल उठाया कि एक राष्ट्र के रूप में पिछले 75 वर्षों में जातिविहीन समाज की दिशा में जो प्रगति हुई है, क्या ये नियम हमें फिर से पीछे की ओर ले जा रहे हैं।
इस प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें राहुल दीवान और अधिवक्ता विनीत जिंदल की याचिकाएं प्रमुख हैं। विनीत जिंदल की ओर से दायर याचिका में नए यूजीसी रेगुलेशंस को सामान्य वर्ग के प्रति भेदभावपूर्ण बताते हुए इन्हें मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करार दिया गया है।
याचिका में विशेष रूप से यूजीसी रेगुलेशंस 2026 की नियमावली के नियम 3(सी) के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग की गई है। साथ ही यह भी आग्रह किया गया है कि वर्ष 2026 के तहत प्रस्तावित व्यवस्था सभी वर्गों पर समान रूप से लागू हो।
याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई है कि इन नियमों की आड़ में सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं, जिससे शैक्षणिक माहौल प्रभावित होगा। मामले की अगली सुनवाई में केंद्र और यूजीसी के जवाब के बाद अदालत आगे की दिशा तय करेगी।



