Budget 2026-27: मालगाड़ियों के लिए नया DFC, सोलर, बायोगैस और CNG में रियायत

रिकॉर्ड पूंजीगत निवेश, हरित ऊर्जा को बढ़ावा, किसानों-राज्यों और बुनियादी ढांचे पर सरकार का व्यापक फोकस
नई दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में पेश आम बजट 2026-27 में आर्थिक विकास को गति देने के लिए भारी पूंजीगत निवेश, हरित ऊर्जा को प्रोत्साहन और सामाजिक-क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष जोर दिया है। बजट में जहां एक ओर दवाओं, बैटरियों और स्वच्छ ईंधन को सस्ता करने की घोषणा की गई है, वहीं दूसरी ओर राज्यों, किसानों, युवाओं और बुनियादी ढांचे को बड़ी राहत देने वाले फैसले सामने आए हैं।
पूंजीगत खर्च में मजबूती, राज्यों को बड़ा हिस्सा
वित्त मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार का कुल पूंजीगत व्यय 12.2 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जिससे बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। राज्यों को 1.4 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है और कर हस्तांतरण में उनका हिस्सा 41 प्रतिशत पर कायम रखा गया है। सरकार का उद्देश्य केंद्र और राज्यों के समन्वय से विकास को जमीनी स्तर तक पहुंचाना है।
परिवहन और लॉजिस्टिक्स के लिए नई योजनाएं
देश की लॉजिस्टिक्स क्षमता को मजबूत करने के लिए मालगाड़ियों हेतु नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के निर्माण की घोषणा की गई है। इसके साथ ही कलिंगानगर में एक नया औद्योगिक केंद्र विकसित किया जाएगा। तटीय माल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजना लाई जाएगी, जिससे परिवहन लागत घटेगी। इसके अलावा देश में सी-प्लेन निर्माण और संचालन को प्रोत्साहित करने के लिए भी नई पहल की जाएगी।
सोलर और हरित ऊर्जा में मिली रियायत
स्वास्थ्य और ऊर्जा क्षेत्र को राहत देते हुए सरकार ने दवाओं और चिकित्सीय उपकरणों पर सीमा शुल्क घटाने का फैसला किया है। सीएनजी और बायोगैस को सस्ता करने की घोषणा से स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बल मिलेगा और सीएनजी वाहनों के उपभोक्ताओं को सीधा लाभ होगा।
बैटरी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए बैटरी निर्माण में प्रयुक्त कच्चे माल पर सीमा शुल्क में छूट दी जाएगी। लिथियम-आयन सेल बनाने वाली मशीनों और उपकरणों पर पहले से दी जा रही छूट को अब बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में उपयोग होने वाले सामान तक विस्तारित किया गया है। सौर ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती देने के लिए सोलर ग्लास निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सोडियम एंटीमोनेट के आयात को भी सीमा शुल्क से मुक्त किया गया है।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर विशेष ध्यान
तटीय क्षेत्रों में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए नारियल, काजू और कोको जैसी अधिक मूल्य वाली फसलों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके साथ ही अखरोट और पाइन नट्स जैसे मेवों की खेती को भी केंद्र सरकार का समर्थन मिलेगा। छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने, युवाओं को रोजगार और कौशल प्रशिक्षण देने तथा कमजोर वर्गों को मानसिक स्वास्थ्य और ट्रॉमा उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है।
पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा
अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और त्रिपुरा में बुद्ध सर्किट का विकास किया जाएगा, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में पर्वतीय रेल परियोजनाएं शुरू करने की घोषणा की गई है। पूर्वोत्तर राज्यों के शहरी परिवहन को मजबूत करने के लिए पांच राज्यों में 5,000 ई-बसें चलाई जाएंगी।
शहरी विकास, बैंकिंग और वित्तीय सुधार
मंदिरों वाले शहरों और दो-तीन बड़े शहरी केंद्रों पर विशेष फोकस करते हुए 5,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बैंकिंग प्रणाली में सुधार के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी। पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और आरईसी के पुनर्गठन की घोषणा की गई है। कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार में टोटल रिटर्न स्वैप की शुरुआत होगी और म्यूनिसिपल बॉन्ड को प्रोत्साहन देने के लिए 100 करोड़ रुपये की योजना लाई जाएगी।
रोजगार, शिक्षा और रचनात्मक अर्थव्यवस्था
कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। एबीजीसी (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) सेक्टर में लगभग 20 लाख पेशेवरों को रोजगार मिलने का अनुमान है। मुंबई में भारतीय रचनात्मक केंद्र की स्थापना होगी, जबकि पूर्वी भारत में एक नया राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान खोला जाएगा। हर जिले में छात्राओं के लिए छात्रावास बनाए जाएंगे। इसके साथ ही राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान और राष्ट्रीय गंतव्य डिजिटल ग्रिड की स्थापना की भी घोषणा की गई है।


