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बलोचिस्तान में हालात बेकाबू, नुश्की से पीछे हटने को मजबूर हुई पाक सेना

The live ink desk.  पाकिस्तान के अशांत बलोचिस्तान प्रांत में सुरक्षा हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने दावा किया है कि उसने नुश्की शहर से पाकिस्तानी सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है और शहर पर उसका प्रभावी नियंत्रण बना हुआ है। लगातार तीसरे-चौथे दिन भी सेना की ओर से शहर में दोबारा पकड़ बनाने के प्रयास सफल नहीं हो सके हैं।

स्थानीय और वैकल्पिक मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नुश्की में जमीनी संचार व्यवस्था ठप है, मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं बाधित हैं तथा पूरे इलाके में भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। पाकिस्तानी सेना ने हवाई हमलों और ड्रोन स्ट्राइक के जरिए दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन बीएलए के लड़ाकों ने मोर्चे संभाले रखे।

फिलहाल, क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो बलोचिस्तान में संघर्ष और गहरा सकता है। उनका कहना है कि नुश्की और आसपास के इलाकों में विद्रोहियों की बढ़ती गतिविधियां पाकिस्तान के लिए गंभीर सुरक्षा और राजनीतिक चुनौती बनती जा रही हैं।

तीन-चार दिन में सैन्य नुकसान का दावा

बीएलए से जुड़े सूत्रों और ‘द बलोचिस्तान पोस्ट’ जैसी रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बीते तीन से चार दिनों के भीतर विभिन्न मुठभेड़ों और समन्वित हमलों में पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों के दर्जनों जवान मारे गए या घायल हुए हैं। कई सैन्य वाहनों, चेकपोस्टों और अस्थायी शिविरों को नुकसान पहुंचने की भी बात कही गई है। हालांकि, पाकिस्तानी सेना ने आधिकारिक तौर पर हताहतों का स्पष्ट आंकड़ा जारी नहीं किया है।

कई जगह हमले, शहरों पर किया कब्जा

रिपोर्टों के मुताबिक, बीएलए ने न केवल नुश्की बल्कि आसपास के कुछ अन्य इलाकों और कस्बों में भी समन्वित कार्रवाई की। संगठन का दावा है कि उसने नुश्की के अलावा कुछ समय के लिए खारान और उसके आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की गतिविधियों को पूरी तरह पंगु कर दिया। कई स्थानों पर पुलिस थानों, सरकारी इमारतों और सुरक्षा चौकियों पर कब्जा या नियंत्रण स्थापित करने की बात कही गई है, हालांकि यह नियंत्रण स्थायी है या अस्थायी—इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

आईएसआई प्रतिष्ठानों पर भी किया अटैक

बीएलए ने यह भी दावा किया है कि नुश्की में स्थित खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े प्रतिष्ठानों और सेना के शिविरों को निशाना बनाया गया। संगठन के अनुसार, वहां तैनात कई अधिकारी और कर्मचारी हताहत हुए। तीन दिन बीतने के बावजूद सेना कथित तौर पर फंसे अपने कर्मियों तक पूरी सहायता नहीं पहुंचा सकी।

शहर में फंसे नागरिक, कैडेट के छात्र चिंतित

नाकाबंदी जैसी स्थिति के चलते नुश्की और आसपास के इलाकों में आम नागरिकों की परेशानी बढ़ गई है। अन्य शहरों में रहने वाले लोग अपने परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। रिपोर्टों में कहा गया है कि नुश्की के कैडेट कॉलेज में दर्जनों छात्र फंसे हुए हैं, जिनसे संपर्क सीमित हो गया है।

मजीद ब्रिगेड के फिदायीन दंपति की मौत

इस बीच, बीएलए के आधिकारिक मंच ‘हकाल’ पर संगठन की मजीद ब्रिगेड से जुड़े एक फिदायीन दंपति की मौत की पुष्टि की गई है। जारी विवरण के अनुसार, यास्मा बलूच उर्फ जरीना और उनके पति वसीम बलोच उर्फ जरबर की मौत पाकिस्तानी सेना के एक शिविर पर हमले के दौरान हुई। दोनों जमरान क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं और लंबे समय से बीएलए से जुड़े हुए थे।

सरकार का सख्त रुख, बातचीत से इनकार

घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने साफ किया है कि सरकार बीएलए जैसे संगठनों से किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं करेगी। उन्होंने नेशनल असेंबली में कहा कि जो समूह महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाते हैं, उनसे सख्ती से निपटा जाएगा। आसिफ ने यह भी आरोप लगाया कि विद्रोही तेल तस्करी से प्रतिदिन अरबों रुपये कमा रहे हैं और विदेशी, विशेषकर अमेरिकी हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से मतभेद भुलाकर सुरक्षा बलों के समर्थन में एकजुट होने की अपील की और कहा कि बलोचिस्तान में कानून-व्यवस्था बहाल करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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