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ट्रंप का दावा- निशाने पर Iran, Hormuz में माइन बिछाने वाले 30 जहाज तबाह

The live ink desk. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई को लेकर बड़ा दावा किया है। व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिका अब तक ईरान के 7,000 से अधिक ठिकानों को निशाना बना चुका है और अभियान का उद्देश्य ईरानी सैन्य क्षमता को निर्णायक रूप से कमजोर करना है।

ट्रंप (Donald Trump) के अनुसार, हालिया हमलों में ईरान के रणनीतिक और रक्षा ढांचे पर केंद्रित कार्रवाई की गई है। उन्होंने दावा किया कि इन हमलों के बाद ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता में लगभग 90 प्रतिशत और ड्रोन हमलों की क्षमता में करीब 95 प्रतिशत तक गिरावट आई है। उन्होंने बताया कि मिसाइल और ड्रोन निर्माण से जुड़ी फैक्ट्रियों को भी निशाना बनाया गया, जिनमें केवल सोमवार को तीन अहम ठिकाने शामिल रहे।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने यह भी कहा कि बीते ढाई सप्ताह में ईरान के 100 से अधिक नौसैनिक जहाजों को नष्ट या डुबो दिया गया है। समुद्री मोर्चे पर कार्रवाई को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में माइन बिछाने की क्षमता को निष्क्रिय करने के लिए 30 से ज्यादा ऐसे जहाजों को तबाह किया गया है, जिनका इस्तेमाल समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने के लिए किया जाता था।

हालांकि ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका के पास इस बात की पुख्ता जानकारी नहीं है कि ईरान ने वास्तव में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में माइन बिछाई हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी बलों ने उन सभी संभावित जहाजों को निशाना बनाया है, जिनका उपयोग इस तरह की गतिविधियों में किया जा सकता था।

ट्रंप (Donald Trump) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री यातायात को सामान्य बनाने के प्रयासों में सहयोग करे। उन्होंने कहा कि कुछ देशों ने इस दिशा में सकारात्मक रुख दिखाया है, जबकि कुछ अभी भी सतर्क हैं।

गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम मार्ग है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और एलएनजी गुजरता है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संभावित खतरों के चलते जहाजरानी पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालिया सैन्य गतिविधियों के बाद स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है, जिस पर वैश्विक समुदाय की नजर बनी हुई है।

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