होली मिलन समारोह: ‘अपनों’ के बीच सजी शाम, कवियों ने जमाई महफिल

शंकरगढ़ के भव्य होली मिलन समारोह में दिखा रंग, संस्कृति और कला का संगम, जनप्रतिनिधियों ने दिया एकता का संदेश
प्रयागराज (आलोक गुप्ता). यमुनापार की नगर पंचायत शंकरगढ़ में शुक्रवार की शाम होली के मदमस्त रंगों से सराबोर नजर आई। केसरवानी धर्मशाला में आयोजित भव्य होली मिलन एवं सम्मान समारोह ने सांस्कृतिक उत्सव का अद्भुत माहौल पैदा कर दिया। जहां रंग, रस, राग और भक्ति का संगम देखने को मिला। घंटों लोग कुर्सी से चिपके नजर आए।
कार्यक्रम में सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्र की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और भी खास बना दिया। समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि मेयर गणेश केसरवानी एवं विशिष्ट अतिथि बारा विधायक डॉ. वाचस्पति ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
मेयर गणेश केसरवानी ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, भाईचारा और समरसता का संदेश देने वाला पर्व है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं। उन्होंने क्षेत्र में सांस्कृतिक गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित करने का आश्वासन भी दिया।
संयुक्त परिवार भारतीय समाज की नींव
मेयर गणेश केसरवानी ने कहा कि संयुक्त परिवार भारतीय समाज की समृद्धि की सबसे मजबूत नींव है, क्योंकि परिवार का एकजुट रहना ही सामाजिक स्थिरता और सांस्कृतिक निरंतरता की गारंटी देता है। उन्होंने कहा कि जब परिवार बिखरते हैं तो उसका सीधा असर समाज पर पड़ता है और सामाजिक ताना-बाना कमजोर होने लगता है। होली, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहार केवल उत्सव नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने वाले सांस्कृतिक सेतु हैं, जो आपसी प्रेम, सहयोग और भाईचारे को मजबूत करते हैं।
विविधताओं के बावजूद एकजुट और अखंड
बारा विधायक डॉ. वाचस्पति ने कहा कि बारा और शंकरगढ़ क्षेत्र में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत सिर्फ उन्हें उचित मंच देने की है। उन्होंने क्षेत्रीय विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास जारी रहेंगे। यही त्योहार हमारी सांस्कृतिक एकता को सशक्त बनाते हैं और इसी वजह से विविधताओं के बावजूद भारत एकजुट और अखंड बना हुआ है।
सही-गलत का बोध कराती अंतरआत्मा
अध्यक्षता कर रहीं मनोरमा दीदी (ब्रह्मकुमारी) ने कहा, जीवन को सही दिशा देने के लिए हमें अपनी तीन तरह की आवाजों को पहचानना और समझना जरूरी है—पहली, अपनी बाहरी आवाज, जो हमारे शब्दों और व्यवहार में प्रकट होती है; दूसरी, मन की आवाज, जो हमारी भावनाओं, इच्छाओं और अंतर्द्वंद्व को दर्शाती है और तीसरी, परमात्मा की आवाज, जो अंतरात्मा के रूप में हमें सही और गलत का बोध कराती है। जब व्यक्ति इन तीनों के बीच संतुलन स्थापित कर लेता है, तब उसके निर्णय स्पष्ट, जीवन शांत और मार्ग सार्थक हो जाता है।
हास्य,व्यंग्य की रचनाओं ने किया मदमस्त
कार्यक्रम के प्रथम चरण में आयोजित कवि सम्मेलन ने श्रोताओं को खूब आकर्षित किया, जिसमें दूर-दराज से आए कवियों ठाकुर इलाहाबादी, सुरेश जी, जय अवस्थी और अभिषेक ने हास्य, व्यंग्य और श्रृंगार रस की शानदार प्रस्तुतियों से माहौल को जीवंत बना दिया। कवियों ने सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर तीखे लेकिन सारगर्भित कटाक्ष किए, जिन्हें श्रोताओं ने जोरदार तालियों के साथ सराहा।
इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष पार्वती कोटार्य, श्रद्धा दीदी, डॉ. विनोद त्रिपाठी, डॉ. प्रताप सिंह, सूर्यनिधान पांडेय, मूलचंद्र केसरवानी, रामखेलावन गुप्ता, ब्राह्मनारायण केसरवानी, अशोक कुमार गुप्ता, रामानुज गुप्ता, केसरवानी महिला सभा की अध्यक्ष वंदना केसरवानी, अनुपमा वैश्य, सुधा गुप्ता, वैशाली केसरवानी, श्वेता गुप्ता, साधना केसरवानी, अंजू केसरवानी, राधा, मीनाक्षी केसरवानी, उमा वर्मा, रोहित गुप्ता, विजय बाबू गुप्ता, मीडिया प्रभारी रामजतन बंसल, प्रांजल केसरवानी, सुजीत केसरवानी, अनूप केसरवानी, सभासद दीपक केसरवानी, व्यापार मंडल अध्यक्ष अरविंद केसरवानी, महामंत्री पंकज गुप्ता, नितेश केसरवानी, बंटी केसरवानी, धीरज वैश्य, संदीप केसरवानी सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में उत्साह, अनुशासन और सांस्कृतिक गरिमा का संतुलन देखने को मिला, जिसने इसे यादगार बना दिया।







