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संसद में उज्ज्वल रमण ने उठाया खाद्य पदार्थों में मिलावट का मुद्दा

कहा- ‘मिलावट मुक्त भारत’ के लिए कड़े कानून की जरूरत

प्रयागराज (आलोक गुप्ता). देश में खाद्य पदार्थों में बढ़ती मिलावट को लेकर संसद में चिंता गहराती जा रही है। लोकसभा के बजट सत्र के दौरान प्रयागराज से सांसद उज्ज्वल रमण सिंह (Ujjwal Raman Singh) ने इस गंभीर मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाते हुए कहा कि “मिलावट मुक्त भारत ही स्वस्थ भारत की असली बुनियाद है।”

खाद्य पदार्थों में मिलावट पर चिंता

सांसद Ujjwal Raman Singh)ने सदन में कहा कि आज दूध, पनीर, खोया, सरसों का तेल, देसी घी और मसालों जैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों में मिलावट आम हो चुकी है। इतना ही नहीं, बाजार में बिकने वाले फलों तक को कृत्रिम तरीके से पकाया जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

उन्होंने खास तौर पर फलों को पकाने में इस्तेमाल होने वाले कैल्शियम कार्बाइड को “सीधा जहर” बताते हुए कहा कि इसके सेवन से हृदय रोग, कैंसर और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का खतरा बढ़ता है।

वैश्विक तुलना में भारत की चुनौती

उज्ज्वल रमण सिंह (Ujjwal Raman Singh) ने यह भी कहा कि कई छोटे और विकासशील देशों में भी खाद्य मिलावट पर सख्त नियंत्रण है, लेकिन भारत जैसे बड़े देश में अब भी आम नागरिक की थाली पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो पाई है। उन्होंने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर संकट बताया।

सरकार के सामने रखे ठोस सुझाव

सांसद ने सरकार से इस दिशा में व्यापक और प्रभावी कदम उठाने की मांग करते हुए कई अहम सुझाव दिए—

  • देशभर में आधुनिक फूड टेस्टिंग और रिसर्च सेंटर स्थापित किए जाएं
  • खाद्य नमूनों की नियमित जांच और सर्वे अनिवार्य किया जाए
  • शिकायत या सैंपल की रिपोर्ट 10 दिनों के भीतर सार्वजनिक करने की व्यवस्था हो
  • मिलावट करने वालों के खिलाफ कम से कम 10 वर्ष की सख्त सजा का प्रावधान किया जाए

सख्ती के बिना नहीं रुकेगी मिलावट

उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक कड़े कानून, त्वरित जांच प्रणाली और कठोर दंड का समन्वय नहीं होगा, तब तक मिलावटखोरी पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण के लिए इस मुद्दे पर तत्काल और ठोस कार्रवाई की जरूरत बताई गई।

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