घूरपुर में किसान–मजदूर संगठनों का प्रदर्शन, राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा

प्रयागराज (श्याम प्रकाश सिंह). गणतंत्र दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा और संयुक्त किसान मोर्चा ने मिलकर क्षेत्र में ट्रैक्टर तिरंगा यात्रा निकाली। यात्रा के समापन पर कार्यकर्ताओं ने घूरपुर थाना परिसर के बाहर एकत्र होकर प्रशासन का ध्यान मजदूर-किसानों की समस्याओं की ओर आकर्षित किया और बारा उपजिलाधिकारी को मौके पर बुलाकर ज्ञापन देने की मांग की।
उपजिलाधिकारी के मौके पर नहीं पहुंचने पर दोनों संगठनों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन थाना प्रभारी के माध्यम से सौंपे। अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा ने एसडीएम के नाम और संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन प्रेषित कर समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।
किसान मजदूर सभा के पदाधिकारियों ने बताया कि यमुना नदी से बालू निकालकर कछार क्षेत्र में खेती करना मछुआरा समुदाय की पारंपरिक आजीविका रही है। वर्ष 2019 में नदी तल से खनन पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद उनका रोजगार प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में बड़े ठेकेदार और माफिया मशीनों के जरिए अवैध खनन कर रहे हैं, जिससे न केवल स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी छीनी जा रही है, बल्कि नदी का पर्यावरण भी नुकसान झेल रहा है। संगठन ने 24 जून 2019 के आदेश को वापस लेकर नावों के जरिए खनन बहाल करने, भारी मशीनों से खुदाई पर रोक लगाने और नदी किनारे खेती करने वालों को कानूनी सुरक्षा देने की मांग उठाई।
संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति के नाम सौंपे ज्ञापन में न्यूनतम समर्थन मूल्य को सी2 लागत पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर कानूनी दर्जा देने, फसलों की गारंटीड खरीद लागू करने और बिजली बिल 2025 व बीज बिल 2025 को निरस्त करने की मांग रखी। संगठन का कहना है कि ये प्रस्तावित कानून किसानों और मजदूरों के हितों के खिलाफ हैं और इससे कृषि क्षेत्र में संकट गहराएगा।
इसके अलावा श्रम कानूनों से जुड़ी चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने, मनरेगा में काम का निर्धारण ग्राम सभा के माध्यम से करने, मजदूरी बढ़ाकर 700 रुपये प्रतिदिन करने, गरीबों को आवास व खेती के पट्टे देने तथा स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने की भी मांग की गई। सामाजिक मुद्दों पर भी ध्यान दिलाते हुए गरीबों के स्कूल बंद न करने और बस्तियों में शराब व नशीले पदार्थों की दुकानों पर रोक लगाने की मांग रखी गई।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।




