ताज़ा खबरभारत

यंत्र इंडिया लिमिटेड को मिनीरत्न-I का दर्जा,  रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बूस्ट

नई दिल्ली. रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यंत्र इंडिया लिमिटेड (वाईआईएल) को ‘मिनीरत्न श्रेणी-I’ का दर्जा प्रदान करने की स्वीकृति दे दी है। इस उपलब्धि पर रक्षा मंत्री ने कंपनी को बधाई देते हुए कहा कि बहुत कम समय में सरकारी ढांचे से निकलकर लाभकारी उपक्रम के रूप में स्थापित होना वाईआईएल की प्रबंधन दक्षता और रणनीतिक दृष्टि का प्रमाण है।

रक्षा मंत्री ने वाईआईएल द्वारा कारोबार विस्तार, स्वदेशीकरण को प्राथमिकता देने और निर्धारित निष्पादन मानकों को पूरा करने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कंपनी ने चार वर्षों से भी कम अवधि में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो वाईआईएल ने स्थापना के बाद से तेज़ विकास दर्ज किया है। जहां वर्ष 2021-22 की दूसरी छमाही में कंपनी की बिक्री 956 करोड़ रुपये के स्तर पर थी, वहीं वित्त वर्ष 2024-25 तक यह बढ़कर 3,108.79 करोड़ रुपये हो गई। निर्यात के क्षेत्र में भी कंपनी ने शून्य से शुरुआत करते हुए इसी अवधि में 321.77 करोड़ रुपये का आंकड़ा छू लिया है। वाईआईएल के प्रमुख उत्पादों में गोला-बारूद, बख्तरबंद वाहनों और मुख्य युद्धक टैंकों के लिए असेंबली सिस्टम, कार्बन व ग्लास कंपोजिट, एल्युमिनियम मिश्र धातु जैसे अत्याधुनिक रक्षा उत्पाद शामिल हैं।

मिनीरत्न-I का दर्जा मिलने के साथ ही वाईआईएल को परिचालन स्तर पर अधिक स्वायत्तता प्राप्त होगी। अब कंपनी बिना केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के 500 करोड़ रुपये तक की पूंजीगत परियोजनाओं, आधुनिकीकरण और उपकरणों की खरीद कर सकेगी। इससे रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ निर्यात संभावनाओं को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में सुधार और दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से पूर्ववर्ती आयुध कारखाना बोर्ड का निगमीकरण कर सात नए रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों का गठन किया था। यंत्र इंडिया लिमिटेड इन्हीं अनुसूची ‘ए’ के डीपीएसयू में शामिल है, जो रक्षा उत्पादन विभाग के अंतर्गत कार्य करता है। इससे पहले मई 2025 में सरकार ने तीन अन्य रक्षा उपक्रमों को भी मिनीरत्न-I का दर्जा दिया था।

यह फैसला ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को सशक्त बनाता है, जिसके तहत रक्षा निर्माण, अनुसंधान और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता घटाकर भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button