
The live ink desk. देश के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट का सिलसिला जारी है, जिससे आर्थिक स्थिरता को लेकर नई चिंताएं उभरने लगी हैं। 13 मार्च को समाप्त सप्ताह में भंडार 7.05 अरब डॉलर घटकर 709.76 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले भी भंडार में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई थी, जो संकेत देता है कि बाहरी आर्थिक दबाव अभी पूरी तरह कम नहीं हुए हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इससे पूर्व सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार 11.68 अरब डॉलर घटकर 716.81 अरब डॉलर पर आ गया था। लगातार दो हफ्तों में आई इस गिरावट से कुल भंडार में तेज कमी दर्ज की गई है, जो नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
भंडार में आई इस कमी का प्रमुख कारण विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (एफसीए) में गिरावट रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 7.68 अरब डॉलर घटकर 555.57 अरब डॉलर रह गईं। यह घटक कुल भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होता है और इसमें कमी का सीधा असर समग्र भंडार पर पड़ता है।
हालांकि, इस दौरान स्वर्ण भंडार ने कुछ हद तक संतुलन बनाने की कोशिश की। सोने के भंडार का मूल्य 0.66 अरब डॉलर बढ़कर 130.68 अरब डॉलर हो गया। यह वृद्धि वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में मजबूती का संकेत भी मानी जा रही है।
इसके अलावा, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) में भी गिरावट दर्ज की गई, जो घटकर 18.69 अरब डॉलर रह गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास भारत की आरक्षित स्थिति भी घटकर 4.81 अरब डॉलर पर आ गई है।
गौरतलब है कि फरवरी के अंत में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 728.49 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद से इसमें लगातार गिरावट देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, डॉलर की मजबूती और पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव के चलते भंडार पर दबाव बना हुआ है।
