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विधानसभा और उप चुनाव के लिए EVM & VVPAT का रैंडमाइजेशन, साझा की गई सूची

नई दिल्ली. आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने तैयारियों को तेज करते हुए असम, केरल और पुडुचेरी में ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनों के पहले चरण का यादृच्छिकीकरण (रैंडमाइजेशन) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस प्रक्रिया को पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक दलों की मौजूदगी में संपन्न कराया गया और संबंधित सूचियां भी साझा की गई हैं।

भारत निर्वाचन आयोग ने 15 मार्च 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के साथ ही छह राज्यों में उपचुनावों की घोषणा की थी। इसके बाद से ही चुनावी प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ाया जा रहा है।

ईवीएम आवंटन की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाती है। पहले चरण में जिला स्तरीय गोदामों से विधानसभा क्षेत्रों को मशीनों का यादृच्छिक आवंटन किया जाता है, जबकि दूसरे चरण में इन्हें विधानसभा क्षेत्र से संबंधित मतदान केंद्रों तक पुनः यादृच्छिक तरीके से वितरित किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना है।

निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा प्रथम स्तरीय जांच (एफएलसी) में मानकों पर खरी उतरी ईवीएम-वीवीपीएटी मशीनों का पहला यादृच्छिकीकरण किया गया। यह प्रक्रिया ईवीएम प्रबंधन प्रणाली (ईएमएस) के माध्यम से राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में पूरी की गई।

असम, केरल और पुडुचेरी में होने वाले आम चुनावों के साथ-साथ गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा में होने वाले उपचुनावों के लिए भी यह चरण पूरा हो चुका है। इन सभी क्षेत्रों में 9 अप्रैल 2026 को मतदान प्रस्तावित है।

यादृच्छिकीकरण के बाद निर्वाचन क्षेत्रवार चयनित ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनों की सूची संबंधित जिला मुख्यालयों में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को उपलब्ध करा दी गई है। इसके बाद इन मशीनों को सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच संबंधित विधानसभा क्षेत्रों के सुरक्षित कक्षों में रखा जाएगा।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी होने के बाद दूसरे चरण का यादृच्छिकीकरण भी किया जाएगा। इस दौरान पहली और दूसरी चयनित ईवीएम-वीवीपीएटी की विस्तृत सूची सभी प्रत्याशियों के साथ साझा की जाएगी, जिससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को और मजबूती मिलेगी।

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