Purvanchal Expressway: आसमानी किलर सुखोई, मिराज, जैगुआर ने भरी उड़ान

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर IAF की आपातकालीन लैंडिंग स्ट्रिप सक्रिय, दिन-रात ऑपरेशन में दिखाई उच्च तैयारी
लखनऊ/सुल्तानपुर (हरिश्चंद्र यादव). उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में स्थित पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (Purvanchal Expressway) पर भारतीय वायु सेना ने 22 अप्रैल को इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) को सफलतापूर्वक सक्रिय करते हुए दिन और रात दोनों समय संचालन क्षमता का प्रदर्शन किया। यह अभ्यास ऐसे समय में किया गया है जब पारंपरिक एयरबेस की अनुपलब्धता में वैकल्पिक हवाई पट्टियों के उपयोग को लेकर रणनीतिक महत्व लगातार बढ़ रहा है।
भारतीय वायु सेना द्वारा आयोजित इस व्यापक ऑपरेशन में जैगुआर, मिराज-2000 और सुखोई-30 एमकेआई जैसे लड़ाकू विमानों के साथ सी-295 और एएन-32 परिवहन विमान तथा एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर शामिल रहे।




इन विमानों ने सीमित समय में एक्सप्रेसवे स्ट्रिप पर लैंडिंग और टेकऑफ कर यह प्रदर्शित किया कि आपात स्थिति में भी तेज़ी से एयर ऑपरेशन संभव है। इसके साथ ही गरुड़ कमांडो बल की तैनाती ने ऑपरेशन को और अधिक सामरिक मजबूती प्रदान की।
अभ्यास के दौरान वायु सेना ने UPEIDA और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करते हुए मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) का परीक्षण किया। अधिकारियों के अनुसार, दिन और रात दोनों परिस्थितियों में अल्प सूचना पर हवाई पट्टी को सक्रिय करने और संचालन शुरू करने की क्षमता का सफल वैलिडेशन हुआ, जिससे प्रतिक्रिया समय में उल्लेखनीय कमी आई है।
इस अभ्यास ने यह भी स्पष्ट किया कि एक्सप्रेसवे आधारित एयरस्ट्रिप्स न केवल वैकल्पिक रनवे के रूप में कार्य कर सकती हैं, बल्कि संकट की स्थिति में सैन्य बलों की त्वरित तैनाती और लॉजिस्टिक सपोर्ट को कई गुना बढ़ाने में सक्षम हैं।
कार्यक्रम के दौरान राज्य मंत्री ओम प्रकाश राजभर सहित वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने मौके पर उपस्थित रहकर पूरे ऑपरेशन का अवलोकन किया। उच्च स्तर पर की गई निगरानी और रीयल-टाइम मूल्यांकन से भविष्य के लिए रणनीतिक सुधार की दिशा भी तय की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की इमरजेंसी लैंडिंग सुविधाएं न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करती हैं, बल्कि आपदा प्रबंधन और मानवीय राहत अभियानों के दौरान भी त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करती हैं।
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (Purvanchal Expressway) पर ELF की यह सक्रियता सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर और सैन्य समन्वय के एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभरी है, जिससे देश की सामरिक तैयारी और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।



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