
The live ink desk. संघर्षविराम के बावजूद हिंसा का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है। Israel ने दक्षिणी Lebanon में पिछले 24 घंटों के भीतर 50 हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 41 लोगों की मौत हुई है। यह हमला-तीव्रता उस सैन्य विराम को चुनौती देती दिख रही है, जो 16 अप्रैल से लागू है। जमीनी हालात बताते हैं कि पूरा इलाका अब भी सक्रिय युद्ध क्षेत्र में तब्दील है, जहां ड्रोन निगरानी और लक्षित बमबारी लगातार जारी है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार शाम से शुरू हुई बमबारी रविवार सुबह तक कई शहरों में तेज धमाकों के साथ जारी रही। दक्षिणी लेबनान के अल-तुफ्फाह जिले और अर-रयहान जैसे इलाकों में भारी तबाही दर्ज की गई है। लगातार हमलों के कारण स्थानीय आबादी बड़े पैमाने पर पलायन कर रही है—परिवारों के साथ सुरक्षित ठिकानों की तलाश में लोगों का विस्थापन बढ़ा है। मौजूदा दौर में केवल 24 घंटे के भीतर 50 स्ट्राइक का आंकड़ा इस बात का संकेत है कि संघर्ष ‘लो-इंटेंसिटी’ से निकलकर फिर ‘हाई-इंटेंसिटी’ फेज में प्रवेश कर रहा है।
ड्रोन डॉमिनेंस: आसमान पर नियंत्रण, जमीन पर संकट
दक्षिणी लेबनान के ऊपर लगातार मंडराते ड्रोन इस संघर्ष के नए आयाम को रेखांकित करते हैं। आधुनिक युद्ध में ‘एरियल सर्विलांस + प्रिसीजन स्ट्राइक’ मॉडल के तहत ड्रोन की भूमिका निर्णायक हो गई है। इससे एक ओर इजराइल को रीयल-टाइम इंटेलिजेंस मिल रही है, वहीं दूसरी ओर नागरिक क्षेत्रों में जोखिम कई गुना बढ़ गया है।
कुल हताहत 2,000 के पार: मानवीय संकट गहराया
ताजा हमलों के साथ लेबनान में मरने वालों की कुल संख्या 2,000 से अधिक हो चुकी है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि संघर्ष अब केवल सीमावर्ती झड़प नहीं, बल्कि व्यापक मानवीय संकट का रूप ले चुका है—जहां स्वास्थ्य सेवाएं, राहत तंत्र और बुनियादी ढांचा दबाव में हैं।
‘सीज़फायर का विघटन और प्रॉक्सी-वार का विस्तार’
विश्लेषकों के अनुसार, यह स्थिति केवल दो देशों के बीच टकराव नहीं रह गई है। Hezbollah की सक्रियता और क्षेत्रीय शक्तियों की अप्रत्यक्ष भागीदारी इसे ‘प्रॉक्सी वॉर’ का स्वरूप दे रही है। अप्रैल में अमेरिकी मध्यस्थता से लागू युद्धविराम अब कमजोर पड़ता दिख रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कूटनीतिक प्रयास जमीनी हकीकत पर असर डालने में फिलहाल नाकाम हैं।
1948 में शुरू हुआ था इजराइल- लेबनान टकराव
इजराइल-लेबनान टकराव की नींव 1948 में इजराइल के गठन के समय ही पड़ गई थी। 1978 का ऑपरेशन लिटानी, 1982 का लेबनान युद्ध और 2006 का 34-दिवसीय संघर्ष इस लंबे विवाद के प्रमुख पड़ाव रहे हैं। 2006 के बाद संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव 1701 के तहत युद्धविराम लागू हुआ, लेकिन शेबा फार्म्स जैसे विवादित क्षेत्रों और हिजबुल्लाह की मौजूदगी ने तनाव को स्थायी रूप से खत्म नहीं होने दिया।
ताजा हमले यह संकेत देते हैं कि युद्धविराम केवल कागजी रह गया है। ड्रोन निगरानी, लगातार हवाई हमले और बढ़ती मौतों के बीच दक्षिणी लेबनान एक बार फिर पूर्ण सैन्य टकराव की ओर बढ़ता दिख रहा है—जहां हर नया हमला क्षेत्रीय अस्थिरता को और गहरा कर रहा है।
