एक बटन के दबने से ढह जाएगा सुपरटेक ट्विन टावर, 3700 किलोग्राम विस्फोटक लगाए गए
नोएडा (the live ink desk). नोएडा सेक्टर 93-A में स्थित सुपरटेक ट्विन टावर (Supertech twin towers) को प्रशासन द्वारा 28 अगस्त को दोपहर ढाई बजे गिरा दिया जाएगा। इस 32 मंजिला इमारत को गिराने में 3700 किलोग्राम विस्फोटक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसे गिराने में 17.5 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस सुपर स्ट्रक्चर को गिराने के लिए इमारत में अलग-अलग हिस्सों में 9643 स्थानों पर होल कर बारूद और विस्फोटक फिट कर दिया गया है। सिर्फ एक बटन के दबने के बाद महज 9 से 12 सेकंड के भीतर सुपरटेक ट्विन टावर पूरी तरह से जमींदोज हो जाएगा।
टावर को गिराने का काम चेन्नई से आई चार लोगों की टीम के द्वारा रिमोट कंट्रोल सिस्टम से अंजाम दिया जाएगा। नोएडा सेक्टर 93-A में स्थित सुपरटेक ट्विन टावर को गिराने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है। मालूम हो कि इस टावर को बनाने में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और नियमों की घोर अनदेखी हुई है। दरअसल आज से लगभग एक साल पहले 31 अगस्त 2021 को देश की सबसे बड़ी अदालत ने नोएडा सेक्टर 93-A में बनी सुपरटेक ट्विन टावर को अवैध घोषित कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि ट्विन टावर को बनाने में नियमों की घोर अनदेखी हुई है। इतना ही नहीं इस पूरे मामले में नोएडा अथॉरिटी के भ्रष्टाचार में लिप्त होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी और आदेश दिया था कि तीन महीने में यानी नवंबर 2021 तक टावर को गिरा दिया जाए। इस फैसले को एमराल्ड कोर्ट सोसाइटी के बायर की जीत के तौर पर देखा गया, क्योंकि रियल स्टेट सेक्टर में यह बायर्स और बिल्डर के बीच एक बड़ा संग्राम था, जिसमें बायर्स की जीत हुई थी।
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सालभर पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश: दरअसल, सुपरटेक ट्विन टावर के बगल में बनी सोसाइटी के दूसरे टावर के लोगों ने ट्विन टावर के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी थी। उनका मानना था कि यह टावर अवैध तरीके से बनाया जा रहा है। ट्विन टावर की खिलाफत करने वालों के लिए यह लड़ाई आसान नहीं थी। यह लड़ाई नोएडा अथॉरिटी से शुरू हुई, इसके बाद हाईकोर्ट पहुंची फिर उसके बाद यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। ट्विन टावर की खिलाफत करने वालों ने तब तक हार नहीं मानी, जब तक सुप्रीम कोर्ट ने उसे अवैध घोषित करते हुए गिराने का आदेश नहीं दे दिया।
इमारत के अवैध घोषित होने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने ट्विन टावर को गिराने के लिए तीन महीने का वक्त दिया था। बावजूद इसके एक साल बाद जाकर ट्विन टावर को 28 अगस्त को जमींदोज कर दिया जाएगा।
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नियमों को ताक पर रख किया गया निर्माण: दरअसल, 23 नवंबर 2004 को नोएडा अथॉरिटी ने सेक्टर 93-ए में ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी को स्वीकृति प्रदान की। इस प्रोजेक्ट के तहत एमराल्ड कोर्ट सोसाइटी को अथॉरिटी ने 14 टावर का नक्शा आवंटित किया, जिसमें सभी टावर ग्राउंड फ्लोर के साथ 9 मंजिल तक पास किए गए। इसके बाद 29 दिसंबर 2006 को नोएडा अथॉरिटी ने ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी के प्रोजेक्ट में पहला संशोधन किया और दो मंजिल और बनाने का नक्शा पास किया। इसके बाद नोएडा अथारिटी कई बार में 40 मंजिल तक का नक्शा पास कर दिया। इस दौरान कई बार महत्वपूर्ण नियमों और मानकों की अनदेखी की गई।
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दोनों टावरों के बीच सिर्फ 9 मीटर की दूरी: 40 मंजिला टावर के लिए 121 मीटर ऊंचाई तक निर्माण की मंजूरी अथारिटी की तरफ से दे दी गई। जिस तरह से सुपरटेक ट्विन टावर का निर्माण किया गया है, उस तरह के निर्माण केलिए दो टावरों के बीच 16 मीटर की दूरी होनी चाहिए। आरडब्लूए के अध्यक्ष उदय भान सिंह का कहना है कि नेशनल बिल्डिंग कोड का नियम है कि किसी भी दो आवासीय टावर के बीच में कम से कम 16 मीटर की दूरी जरूर है, परंतु इस प्रोजेक्ट में नौ मीटर से भी कम की दूरी है।
शिकायत के बाद इस पूरे प्रकरण में नोएडा अथॉरिटी सहित 24 अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की गई। इस पूरे प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि नोएडा अथॉरिटी ने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया और नियमों की धज्जियां उड़ाई।