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देश की एक बड़ी आबादी पी रही जहरीला पानी, गांवों में स्थिति ज्यादा खतरनाक

नई दिल्ली (The live ink desk). केंद्र सरकार ने राज्यसभा में कहा है कि देश में पेयजल की गुणवत्ता दिनोंदिन खराब होती जा रही है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक शहरों की तुलना में गांवों में यह समस्या ज्यादा गंभीर है। चूंकि, भारत की ज्यादा आबादी गांवों में निवास करती है, ऐसे में इस पानी के सबसे ज्यादा उपभोक्ता गांवों में ही हैं, जहां पर पेयजल का अहम जरिया हैंडपंप, कुएं, नदियां और तालाब आदि हैं।

गांवों में पानी का पानी सीधे जमीन से लिया जाता है। इससे इतर, गांवों में इस पानी को साफ करने का कोई तरीका नहीं होता, इसलिए ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के समक्ष पेयजल का संकट ज्यादा गंभीर है। केंद्र सरकार के द्वारा राज्यसभा में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक अब तक हम जो पानी पीते रहे हैं, वह काफी हद तक प्रदूषित है।

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देश के लगभग सभी राज्यों के अधिकांश जिलों में ग्राउंड वाटर में ज्यादा मात्रा में जहरीले तत्व पाए गए हैं। जल शक्ति मंत्रालय के एक दस्तावेज के मुताबिक देश की 80 फीसद से अधिक आबादी को जमीन से मिलने वाले पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। अगर भूजल में ज्यादा मात्रा में खतरनाक तत्व मिलते हैं तो इसका मतलब पानी, पेयजल की श्रेणी में नहीं रह गया है। राज्यसभा में सरकार ने रिहायशी इलाकों कीसंख्या भी बताई है, जहां पेयजल के सोर्स प्रदूषित हो गए हैं। इसके अनुसार 671 क्षेत्र से फ्लोराइड, 814 क्षेत्र से आर्सेनिक, 14079 क्षेत्र से आयरन, 9930 क्षेत्र से सलीनिटी, 517 क्षेत्र से नाइट्रेट और 111 क्षेत्र के पेयजल में हैवी मेटल्स (भारी धातु) की अधिकता पाई गई है।

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संसद में भूजल पर दिए गए आंकड़े के मुताबिक 25 राज्यों के 209 जिलों के भूजल में आर्सेनिक की मात्रा 0.01 मिलीग्राम प्रतिलीटर से अधिक है। 16 राज्यों के 62 जिलों में भूजल में क्रोमियम की मात्रा 0.05 मिलीग्राम प्रतिलीटर से अधिक है।

इसी तरह 11 राज्यों के 29 जिलों के भूजल में कैडमियम की मात्रा 0.003 मिलीग्राम प्रतिलीटर से अधिक पाई गई है। इसी तरह 18 राज्यों में 152 जिलों में भूजल में यूरेनियम की मात्रा 0.03 मिलीग्राम प्रतिलीटर अधिक पाई गई है। आमतौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति रोजाना औसतन तीन लीटर पानी कासेवन करता है। ऐसे में यदि आप रोजाना दो लीटर भी पानी पी रहे हैं तो आपके शरीर में भी कुछ मात्रा में जहर जा रहा है।

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