
The live ink desk. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव (US-Iran Tensions) के बीच क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। जिनेवा में परमाणु मुद्दे पर दूसरे दौर की वार्ता के बाद अमेरिका ने 50 से अधिक लड़ाकू विमानों को मध्य-पूर्व की ओर रवाना किया है। सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने वाले संगठनों और फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, F-22 Raptor, F-35 Lightning II और F-16 Fighting Falcon जैसे विमान क्षेत्र की ओर बढ़ते दर्ज किए गए हैं।
तेज होती सैन्य तैनाती ने मध्य-पूर्व में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ बढ़ती सैन्य गतिविधियां वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव डाल सकती हैं।
दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की तैनाती
अमेरिका ने अपने दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी मध्य-पूर्व की दिशा में मोड़ दिए हैं। इनमें से एक, USS Abraham Lincoln, ईरानी तट से लगभग 700 किलोमीटर दूरी पर ट्रैक किया गया है। दूसरा, USS Gerald R. Ford, कैरिबियन से रवाना होकर अटलांटिक के मध्य भाग में पहुंच चुका है और आगे पश्चिम एशिया की ओर अग्रसर है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, फोर्ड के साथ तीन गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर भी तैनात हैं। अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में यह समूह क्षेत्र में सक्रिय हो सकता है।
ईरान का सैन्य अभ्यास
तनाव के समानांतर ईरान ने ‘स्मार्ट कंट्रोल ऑफ द स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ नामक युद्धाभ्यास शुरू किया है। अभ्यास के दौरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों में अस्थायी प्रतिबंध लगाए गए। ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फारस की खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल परीक्षण भी किए गए। हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है, जिससे विश्व ऊर्जा बाजार पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है।
रूस और चीन की मौजूदगी
क्षेत्रीय समीकरणों के बीच रूस ने अपनी नौसेना टुकड़ी ‘स्टोइकी’ को ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह पर भेजा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सलाहकार निकोलाई पत्रुशेव ने रूसी मीडिया से बातचीत में समुद्री क्षेत्रों में बहुध्रुवीय व्यवस्था के समर्थन की बात कही।
इसी क्रम में चीन ने भी हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अपने युद्धपोत तैनात किए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम क्षेत्र में सामरिक संतुलन और अमेरिका के विरुद्ध रणनीतिक एकजुटता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।





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