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गोलमेज सम्मेलनः चुनावी समन्वय पर सहमति, 27 साल बाद 30 राज्यों ने की भागीदारी

नई दिल्ली. भारत निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित मुख्य निर्वाचन आयुक्त और राज्य चुनाव आयुक्तों का राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन सोमवार को भारत मंडपम में संपन्न हुआ। 27 वर्ष बाद आयोजित इस व्यापक संवाद में 30 राज्यों के चुनाव आयोगों ने भागीदारी की।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुए सम्मेलन में निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी मौजूद रहे। राज्य चुनाव आयुक्तों ने लंबे अंतराल के बाद आयोजित इस पहल को संस्थागत समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और इसे वार्षिक आधार पर आयोजित करने पर सहमति जताई।

राष्ट्रीय घोषणा 2026’ पर सहमति

सम्मेलन में सभी राज्यों के चुनाव आयोगों ने ‘राष्ट्रीय घोषणा 2026’ को अपनाने का संकल्प लिया। इसमें स्पष्ट किया गया कि निष्पक्ष और त्रुटिरहित मतदाता सूची लोकतंत्र की आधारशिला है, जबकि पारदर्शी एवं कुशल चुनाव प्रबंधन लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करता है।

प्रक्रियागत तालमेल के लिए साझा ढांचा

भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य चुनाव आयोगों (एसईसी) के साथ परस्पर स्वीकार्य और विधिक रूप से व्यवहार्य तंत्र विकसित करने का प्रस्ताव रखा। इसमें ईसी-आई-नेट, ईवीएम के उपयोग, मतदाता सूची प्रबंधन तथा भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन संस्थान (आईआईडीईएम) की प्रशिक्षण अवसंरचना को साझा करने जैसे पहलू शामिल हैं। उद्देश्य यह है कि चुनावी प्रक्रियाओं में तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।

कानूनों के सामंजस्य पर जोर

घोषणा में यह भी उल्लेख किया गया कि पंचायतों और शहरी निकायों के चुनावों से जुड़े कानूनों को संसद और राज्य विधानसभाओं के चुनावी कानूनों के अनुरूप बनाने के लिए संयुक्त प्रयास किए जाएंगे। इसे राष्ट्रीय और संवैधानिक हितों के अनुरूप संस्थागत समरूपता की दिशा में अहम कदम माना गया।

भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य चुनाव आयोगों से अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोग कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी का अनुरोध भी किया, ताकि वैश्विक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से सीख और अनुभव का आदान-प्रदान हो सके।

विधिक और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम

सम्मेलन के दौरान प्राप्त सुझावों की समीक्षा के लिए उप चुनाव आयुक्तों के नेतृत्व में विधिक और तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम गठित की गई है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से तीन माह के भीतर विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा गया है, जिसके आधार पर राष्ट्रीय हित में आगे की रणनीतिक निर्णय-प्रक्रिया तय की जाएगी।

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