नव संवत्सर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्थापित किया स्वर्ण जड़ित ‘श्रीराम यंत्र’

अयोध्या. चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन अयोध्या में भक्ति और वैदिक परंपरा का विराट संगम देखने को मिला, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के द्वितीय तल स्थित गर्भगृह में ‘श्रीराम यंत्र’ की विधिवत स्थापना की। अभिजीत मुहूर्त में वैदिक आचार्यों के मंत्रोच्चार के बीच सम्पन्न यह अनुष्ठान मंदिर इतिहास का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
राष्ट्रपति के आगमन पर महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वागत किया। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने ‘नगर की चाबी’ भेंट कर पारंपरिक सम्मान दिया।
एयरपोर्ट से मंदिर तक पूरा मार्ग सांस्कृतिक आयोजनों से सजा रहा। करीब 20 मंचों पर 250 से अधिक कलाकारों ने रामायण आधारित प्रस्तुतियों, लोकगीत-नृत्य, भजन और रामलीला अंशों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर राष्ट्रपति का स्वागत किया।
मंदिर पहुंचकर राष्ट्रपति ने रामलला के दर्शन-पूजन के बाद ‘श्रीराम यंत्र’ स्थापना का विधान सम्पन्न कराया। इस दौरान मां अमृतानंदमयी, ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, ट्रस्टी अनिल मिश्रा समेत देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। परिसर ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गूंज उठा।
करीब 150 किलोग्राम वजनी, स्वर्णजड़ित पंचधातु से निर्मित यह यंत्र वैदिक गणितीय संरचनाओं पर आधारित है, जिसमें 121 देवी-देवताओं के बीज मंत्र अंकित माने जाते हैं। इसे दिव्य ऊर्जा और आध्यात्मिक संतुलन का प्रतीक माना जाता है। दो वर्ष पूर्व जगद्गुरु विजयेन्द्र सरस्वती द्वारा अयोध्या भेजे गए इस यंत्र की स्थापना से पहले नौ दिवसीय वैदिक अनुष्ठान भी सम्पन्न हुआ था।
सुरक्षा कारणों से यह यंत्र आम दर्शन के लिए उपलब्ध नहीं होगा।
श्रीराम यंत्र की खूबियांः
- धातु: यह यंत्र पंचधातु से बना है और इस पर सोने की परत (Gold-plated) चढ़ाई गई है। इस भव्य यंत्र का कुल वजन लगभग 150 किलोग्राम है।
- दिव्य ऊर्जा का प्रतीक: यह यंत्र भगवान श्री राम की दिव्य ऊर्जा, मर्यादा और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
- 121 देवताओं का वास: इस स्वर्णिम यंत्र में भगवान श्रीराम के साथ-साथ 121 देवी-देवताओं की मौजूदगी मानी गई है। इसमें प्रत्येक देवता का विशिष्ट बीज मंत्र अंकित है।
- भव्य संरचना: यह यंत्र एक आयताकार धातु की प्लेट (स्वर्णिम यंत्र) है, जिसकी माप लगभग 3 फीट चौड़ाई और 3 से 4 फीट लंबाई है।
- ज्यामितीय और वैदिक महत्व: इसमें विशिष्ट ज्यामितीय आकृतियाँ (जैसे त्रिकोण), पवित्र रेखाएँ और वैदिक मंत्र उकेरे गए हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
- आध्यात्मिक पूर्णता: मंदिर के सबसे ऊपरी तल (द्वितीय तल) पर इसकी स्थापना को पूर्णता (completeness) का प्रतीक माना गया है।
- दर्शन की स्थिति: सुरक्षा और स्थान की कमी के कारण, यह यंत्र आम भक्तों के दर्शन के लिए उपलब्ध नहीं होगा, क्योंकि इसे मंदिर के ऊपरी हिस्से में सुरक्षित रखा गया है।



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