
The live ink desk. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रियता बढ़ गई है। ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, जापान और दक्षिण कोरिया समेत 20 से अधिक देशों ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए सहयोग देने की इच्छा जताई है।
करीब 22 देशों द्वारा जारी संयुक्त बयान में खाड़ी क्षेत्र में नागरिक जहाजों और ऊर्जा ढांचे पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की गई है। साथ ही, ईरान द्वारा इस जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में उत्पन्न अवरोध पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया है कि सभी देश सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को तैयार हैं। इसके लिए प्रारंभिक रणनीतियों पर भी काम शुरू कर दिया गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां से दुनिया के कुल तेल और गैस परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। मौजूदा हालात में इस मार्ग पर बढ़े जोखिम और बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर सीधे वैश्विक बाजार पर पड़ रहा है।
विश्लेषण के अनुसार, 1 मार्च से 19 मार्च के बीच इस मार्ग से केवल 116 जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई, जो सामान्य समय की तुलना में लगभग 95 प्रतिशत कम है। इस गिरावट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है।
संयुक्त बयान में शामिल देशों ने नागरिक बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से तेल और गैस संयंत्रों पर हमलों को तुरंत रोकने की मांग की है। साथ ही सभी पक्षों से संयम बरतने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने की अपील की गई है।
उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता गया है। इसके जवाब में ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में जहाजों और अन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो इसका व्यापक प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।



