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Narendra Modi ने ली शपथ, लगातार तीसरी बार बने भारत के प्रधानमंत्री

The live ink desk. रविवार की शाम राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के संसदीय दल के नेता नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में रविवार को आयोजित समारोह में उनको पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

लगातार प्रधानमंत्री बनने की हैट्रिक लगाने वाले नेताओं की सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होगए हैं। नरेंद्र मोदी के साथ आज तीस सांसदों ने कैबिनेट मंत्री और पांच सांसदों ने राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के पद की शपथ ली।

राष्ट्रपति भवन में रविवार की शाम आयोजित ओथ सेरेमनी में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोब्गे, नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचंड’, श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मोइज्जू और मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ भी उपस्थित रहे।

इसके अलावा देशभर के नेता, मुख्यमंत्री, विपक्षी नेता, सांसद, फिल्मी हस्तियां, उद्योगपति, साधु-संत के साथ आम लोगों ने भी शपथग्रहण समारोह में शामिल हुए। उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, गठबंधन के सहयोगी दलों के नेता, उद्योगपति मुकेश अंबानी, गौतम अडानी, फिल्म अभिनेता रजनीकांत, शाहरूख खान, अक्षय कुमार, अभिनेत्री रवीना टंडन भी मौजूद रहीं।

संडे को बना लगातार प्रधानमंत्री बनने का रिकार्ड

रविवार की शाम प्रधानमंत्री पद की तीसरी बार शपथ लेने के साथ ही नरेंद्र मोदी ने पंडित जवाहर लाल नेहरू के लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनने के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। जवाहरलाल नेहरू वर्ष 1952, 1957 एवं 1962 का आम चुनाव जीतकर लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बने थे। वहीं नरेंद्र मोदी ने 2014 एवं 2019 के बाद 2024 में तीसरी बार शपथ ली है।

नरेंद्र मोदी के अलावा शपथ लेने वालों में राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शपथ ली। जेपी नड्डा मोदी 1.0 में मंत्री रह चुके हैं, जबकि शिवराज सिंह चौहान पहली बार केंद्र में मंत्री बनाए गए हैं।

निर्मला सीतारमण और एस जयशंकर भी बने मंत्री

इसके अलावा निर्मला सीतारमण और डा. सुब्रमण्यम जयशंकर ने शपथ ली। दोनों पिछले कार्यकाल में क्रमश: वित्त एवं विदेश मंत्री रह चुके हैं। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर इस बार करनाल से चुनकर आए हैं।उन्हें भी मंत्रिमंडल में स्थान मिला है।

एनडीए के सहयोगी दलों में सबसे पहले एचडी कुमारस्वामी ने शपथ ली। वे पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के सुपुत्र हैं। उनके बाद पीयूष गोयल और धर्मेन्द्र प्रधान ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। गोयल और प्रधान पिछले कार्यकाल में भी मंत्री पद संभाल चुके हैं।

इसके बाद एनडीए के ही सहयोगी दल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के नेता एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और जनता दल (यू) के नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने शपथ ली। इनके बाद असम के पूर्व मुख्यमंत्री और पिछली मोदी सरकार में मंत्री सर्वानंद सोनोवाल और भाजपा नेता डा. वीरेंद्र कुमार ने शपथ ली।

गिरिराज, अश्विनी वैष्णव, सिंधिया भी कैबिनेट में

तेलुगु देशम पार्टी के नेता और तीसरी बार सांसद बने किंजरापु राम मोहन नायडू ने शपथ ली। वे मोदी 3.0 में सबसे युवा मंत्री बनने जा रहे हैं। इसके बाद प्रह्लाद जोशी ने शपथ ली। कर्नाटक से आने वाले जोशी पिछली सरकार में संसदीय कार्यमंत्री रहे। इसके बाद जोएल ओराम ने मंत्री पद की शपथ ली।

इसी तरह गिरिराज सिंह, अश्विनी वैष्णव, ज्योतिरादित्य सिंधिया, भूपेंद्र यादव, गजेंद्र सिंह शेखावत, अन्नपूर्णा देवी, किरण रिजिजू, हरदीप सिंह पुरी, मनसुख मंडाविया और जी किशन रेड्डी ने शपथ ली। ये सभी पिछले कार्यकाल में मंत्री रह चुके हैं हैं। अन्नपूर्णा देवी पिछली बार राज्यमंत्री थीं। वे कैबिनेट में शामिल होने वाली दूसरी महिला मंत्री रहीं। इनके बाद लोक जनशक्ति पार्टी के चिराग पासवान और नवसारी से सांसद बने सीआर पाटिल ने शपथ ली।

इसके बाद राव इंद्रजीत सिंह, डा. जीतेंद्र सिंह, अर्जुन राम मेघवाल, प्रतापराव जाधव और जयंत चौधरी ने राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के तौर पर शपथ ली।

विदिशा से छह बार सांसद चुने गए शिवराज सिंह

विदिशा सीट से सांसद चुने गए शिवराज सिंह चौहान पहली बार केंद्रीय मंत्री बने हैं। लोकसभा चुनाव 2024 में वे विदिशा से छठीं बार सांसद चुने गए हैं। शिवराज सिंह चौहान प्रदेश में भाजपा के सबसे कद्दावर नेता हैं। वह मध्य प्रदेश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने सर्वाधिक समय तक मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाला है। वह चार बार मप्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनका कार्यकाल करीब 16.5 वर्ष का रहा।

पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में जब भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 163 सीटें जीतीं, तब अटकलें लगाई जा रही थीं कि वह पांचवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने डा. मोहन यादव के नाम पर मुहर लगाई, तो शिवराज ने इस फैसले को सहर्ष स्वीकार कर लिया।

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