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800 बरस बाद भारत को मिला Nalanda: Modi ने कहा- आग की लपटें ज्ञान को नहीं मिला सकतीं

The live ink desk. भारतीय शिक्षा का अप्रतिम प्रतीक नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda University) फिर लौट आया है। पूरे 800 बरस बाद हम नालंदा को उसके नये स्वरूप में देख रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने बुधवार (19 जून, 2024) को बिहार के राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के नये परिसर का उद्घाटन किया।

इतिहास में दर्ज होने जा रहे इस मौके के साक्षी बने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, विदेश मंत्री डा. एस. जयशंकर, 17 देशों के राजदूत, संसदीय कार्यमंत्री विजय चौधरी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी। नवीन नालंदा विश्वविद्यालय देश को समर्पित करते हुए पीएम ने कहा, नालंदा विश्वविद्यालय आने का मौका मिलना ही मेरे लिए सौभाग्य की बात है।

नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने कहा,  नालंदा केवल नाम नहीं है। नालंदा एक पहचान है। एक सम्मान है। एक मूल्य है, मंत्र है और गौरव गाथा है। नालंदा, इस सत्य का उद्घोष है कि आग की लपटों में पुस्तकें भले जल जाएं, लेकिन आग की लपटें ज्ञान को नहीं मिटा सकती। नालंदा (Nalanda University) के विध्वंस ने भारत को अंधकार से भर दिया था। इसकी पुनर्स्थापना भारत के स्वर्णिम युग की नींव रखने जा रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा, अपने प्राचीन अवशेषों के करीब नालंदा का नवजागरण, ये नया कैंपस विश्व को भारत के सामर्थ्य से रूबरू कराएगा। नालंदा बताएगा जो राष्ट्र मजबूत मानवीय मूल्यों पर खड़े होते हैं वो इतिहास को पुनर्जीवित कर बेहतर भविष्य की नींव रखना जानते हैं। नालंदा केवल भारत के अतीत का पुनर्जागरण नहीं है, बल्कि इसमें विश्व के कई देशों की विरासत जुड़ी हुई है।

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने यह भी कहा कि हम सभी जानते हैं कि नालंदा कभी भारत की परंपरा और पहचान का जीवंत केंद्र हुआ करता था। शिक्षा को लेकर यही भारत की सोच रही है। शिक्षा ही हमें गढ़ती है, विचार देती है और उसे आकार देती है। प्राचीन नालंदा में बच्चों का प्रवेश उनकी पहचान, उनकी राष्ट्रीयता को देख कर नहीं होता था। हर देश हर वर्ग के युवा यहां पर अध्ययन करने के लिए आते थे।

प्राइम मिनिस्टर ने कहा कि हमें नालंदा के नये स्वरूप में उसी प्राचीन व्यवस्था को फिर से आधुनिक रूप में मजबूती देनी है। यह देखकर खुशी हो रही है कि दुनिया के कई देशों से आज यहां विद्यार्थी आने लगे हैं। नालंदा में 20 से ज्यादा देशों के छात्र वर्तमान समय में अध्ययन कर रहे हैं। यह ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना का सुंदर प्रतीक है।

नरेंद्र मोदी ने 21 जून को होने जा रहे दसवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का जिक्र करते हुए कहा, भारत में योग की सैकड़ों विधाएं मौजूद हैं। हमारे ऋषियों-मुनियों ने इन विधाओं को प्राप्त करने में कितना शोध किया होगा, लेकिन किसी ने भी योग पर अपना एकाधिकार नहीं बनाया। आज समूचा विश्व योग को अंगीकार कर रहा है।

455 एकड़ में तामीर हुआ नालंदा विश्वविद्यालय

नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda University) के नये भवन की स्थापना 455 एकड़ के विशाल भूखंड पर की गई है। यह एरिया राजगीर (Rajgir) की पंच पहाड़ियों में शुमार वैभारगिरि की तलहटी में स्थित है। नये परिसर में 24 बड़ी इमारतें हैं। 450 की क्षमता का हास्टल, शॉपिंग कांप्लेक्स, फूड कोर्ट, 40 हेक्टेयर में जलाशय, अखाड़ा, ध्यान कक्ष, 300 की क्षमता का ऑडिटोरियम, योग परिसर, स्टेडियम, एथलेटिक ट्रैक, आउटडोर स्पोर्ट्स स्टेडियम, व्यायामशाला, अस्पताल, पारंपरिक आहर-पइन जल नेटवर्क, सोलर फार्म शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नये नालंदा विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया। सुषमा स्वराज सभागार में छात्रों और संकाय सदस्यों को संबोधित भी किया।

प्राचीन नालंदा परिसर में घूमे पीएम नरेंद्र मोदी

समूचे विश्व में शिक्षा का केंद्र रहे प्राचीन नालंदा परिसर (Nalanda University) का भ्रमण भी किया। शिक्षा और शोध के केंद्र के रूप में विख्यात नालंदा विश्वविद्यालय का भ्रमण करते हुए पीएम ने अवशेष खंडहर के प्रत्येक कोना बड़े करीने से निहारा। प्राचीन नालंदा भारत में उच्च शिक्षा के विश्वविख्यात केंद्र था। इसकी स्थापना गुप्त वंश के शासक कुमार गुप्त प्रथम ने पांचवीं शताब्दी (450-470 में) की थी। प्राचीन नालंदा ने आठ शताब्दियों तक ज्ञान का उजियारा समूचे विश्व में फैलाया। उस दौर में यहां दस हजार विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए 2000 शिक्षक तैनात थे। प्राचीन नालंदा परिसर आज के पटना शहर से 88.5 किमी दक्षिण-पूर्व और राजगीर (Rajgir) से 11.5 किमी उत्तर में स्थित है।

विदेश मंत्री व मुख्यमंत्री बिहार ने भी रखे विचार

विदेश मंत्री सुब्रह्मण्‍यम जयशंकर ने इस अवसर पर कहा कि वह ज्ञान के एक वैश्विक पुल के पुनरुद्धार को देख रहे हैं, जो अतीत की तुलना में और भी मजबूत रिश्ते बना सकता है। डा. जयशंकर ने कहा कि शिक्षा, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण अंतरराष्ट्रीय समझ को बढ़ावा देने का सबसे प्रभावी तरीका है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय का गौरवशाली इतिहास रहा है। प्राचीन काल में नालंदा विश्वविद्यालय की पहचान शिक्षा के केंद्र के रूप में थी।

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