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Election Results: पढ़ें 543 सीटों का लेखाजोखा, देशभर में किसे मिली कितनी सीट

The live ink desk. लोकसभा चुनाव 2024 का चुनाव परिणाम हम सबके सामने है। अकेले दम पर बहुमत से काफी आगे का लक्ष्य लेकर चल रही भाजपा 240 सीटों पर सिमट गई तो दूसरीसबसे बड़ी पार्टी बनकर कांग्रेस उभरी। कांग्रेस को 99 सीटें मिलीं। 2019 में यही कांग्रेस 52 सीटों पर सिमट गई थी। अब हम बात करेंगे कि किस राज्य में किसे कितनी सीटें मिलीं, जिसने 2024 के चुनाव में 400 पार वाले नारे पर नकेल कस दी।

देशभर के 36 राज्यों (केंद्र शासित भी) के चुनाव नतीजों की शुरुआत अंडमान एंड निकोबार द्वीप से। यहां पर लोकसभा की एकमात्र सीट है, जिस पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत हासिल की है। एक सीट वाले चंडीगढ़ में कांग्रेस ने जीत का सेहरा पहना। एक सीट वाले लद्दाख में निर्दल प्रत्याशी और एक सीट वाले लक्ष्यद्वीप में कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। मिजोरम की एक मात्र सीट पर जेडपीएम (जोरम पीपुल्स मूवमेंट) प्रत्याशी की जीत हुई है। एक सीट वाले स्टेट पुडुचेरी में भी कांग्रेस ने जीत हासिल की है।

एक सीट वाले राज्य नागालैंड में कांग्रेस ने क्लीन स्वीप किया है। इसी तरह दो सीटों वाले दादरनगर हवेली एंड दमन द्वीप में भाजपा को एक और कांग्रेस को एक सीट मिली है। इसी तरह की स्थिति गोवा की है। दो सीटों वाले गोवा में एक सीट कांग्रेस के खाते में तो दूसरी भाजपा के खाते में गई है, जबकि दो सीटों वाले राज्य त्रिपुरा में भाजपा ने क्लीन स्वीप किया है।

देश की राजधानी में भाजपा का कद बरकरार

देश की राजधानी दिल्ली (केंद्र शासित प्रदेश) की बात करें तो यहां पर लोकसभा की कुल सात सीटें हैं। राजनीति के केंद्र वाले इस प्रदेश में सभी सात सीटों पर सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों ने जीत का सेहरा पहना है। इसी तरह की स्थिति ओडिशा में है। जहां की कुल 21 सीटों में से 20 पर भाजपा ने क्लीन स्वीप किया है। सिर्फ एक सीट से कांग्रेस को जीत का मौका मिला।

अब चलते हैं आंध्र प्रदेश, जहां पर लोकसभा की कुल 25 सीटें हैं। यहां पर भाजपा के सहयोगी दल टीडीपी ने अच्छा प्रदर्शन किया है और उसे कुल 16 सीटों पर जीत मिली है। जबकि वाईएसआरसीपी को चार, भाजपा को तीन और जेएनपी को दो सीटों पर जीत मिली। 13 लोकसभा सीटों वाले राज्य पंजाब में सात सीटों पर कांग्रेस, तीन पर आम आदमी पार्टी, एक पर शिरोमणि अकाली दल की जीत हासिल हुई, जबकि यहां से दो निर्दल प्रत्याशी भी चुनाव जीतने में कामयाब रहे।

बिहार में भाजपा और जदयू को मिलीं 24 सीटें

नार्थ ईस्ट के अरुणाचल प्रदेश की बात करें तो यहां पर भाजपा ने क्लीन स्वीप किया है। अरुणांचल प्रदेश में कुल दो सीटें हैं, दोनों पर भारतीय जनता पार्टी को विजय मिली है। नौ लोकसभा सीटों वाला अगला राज्य असम है। असम की कुल 14 सीटों में भाजपा को नौ सीटों पर, कांग्रेस को तीन, यूपीपीएल और एजीपी को एक-एक सीटों पर जीत हासिल हुई है।

अगले नंबर पर बिहार है, जहां पर लोकसभा की कुल 40 सीटें हैं। यहां पर भाजपा ने 12 सीटों पर जीत हासिल की तो भाजपा के सहयोगी दल जदयू ने भी 12 सीटों पर अपने परचम लहराया। जबकि पांच सीटों पर एलजेपीआरवी, चार सीटों पर आरजेडी, तीन सीटों पर कांग्रेस, दो सीटों पर कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया (मार्क्सवादी, लेनिनवादी) और एक सीट पर निर्दल प्रत्याशी की जीत हुई है।

छत्तीसगढ़ और गुजरात में चला मोदी मैजिक

बिहार के बाद आपको ले चलते हैं छत्तीसगढ़, जहां पर लोकसभा की कुल 11 सीटें हैं। इन 11 सीटों में सिर्फ एक सीट को छोड़कर सभी 10 पर भाजपा के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज कराई है। कुल मिलाकर यहां पर कह सकते हैं कि छत्तीसगढ़ में भी भाजपा ने क्लीन स्वीप किया है। एक सीट कांग्रेस के खाते में गई।

इसी तरह की स्थिति गुजरात की है। जहां पर लोकसभा की कुल 26 सीटें हैं। गुजरात की कुल 26 सीटों में सिर्फ एक पर कांग्रेस को जीत हासिल हुई जबकि शेष 25 सीटों पर भाजपा ने क्लीन स्वीप किया है। यहां पर भाजपा के क्लीन स्वीप का स्ट्राइक रेट 95 फीसद से भी अधिक है।

हिमाचल की चार सीटों पर भगवा का क्लीनस्वीप

देश की राजधानी दिल्ली के समीपवर्ती राज्य हरियाणा में भाजपा और कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया है। 10 सीटों वाले इस राज्य में पांच सीटें भाजपा तो पांच कांग्रेस के खाते में गईं। हरियाणा के बाद हिमाचल प्रदेश का रुख करते हैं, जहां पर लोकसभा की कुल चार सीटें हैं। कंगना रानौत भी यहीं की मंडी लोकसभा सीट से निर्वाचित हुई हैं। हिमाचल प्रदेश की सभी चार सीटों पर भाजपा ने क्लीन स्वीप किया है।

2024 के आम चुनाव में जम्मू-कश्मीर के मतदाताओं ने काफी उत्साह के साथ वोटिंग की। यहां की कुल पांच सीटों में दो पर भाजपा, दो पर जेकेएन की जीत हुई है, जबकि एक सीट पर निर्दल प्रत्याशी को जीत का सौभाग्य प्राप्त हुआ। जम्मू एंड कश्मीर के बाद आते हैं झारखंड, जहां पर लोकसभा की कुल 14 सीटों में आधे से अधिक आठ सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत हासिल की है। तीन सीटों पर झारखंड मुक्ति मोर्चा, दो पर कांग्रेस और एक सीट पर एजेएसयूपी प्रत्याशी को जीत मिली है।

केरल में खुला भारतीय जनता पार्टी का खाता

झारखंड के बाद अगला राज्य कर्नाटक, जहां पर कुल 28 सीटें हैं। कर्नाटक की आधे से अधिक 17 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी, नौ पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और दो सीटों पर जेडीएस प्रत्याशी ने जीत हासिल की। कर्नाटक के बाद कांग्रेस के प्रभुत्व वाले केरल की बारी है, जहां की वायनाड सीट से राहुल गांधी ने 2019 का चुनाव जीता था।

देश के सबसे साक्षर राज्यों में शामिल केरल में लोकसभा की कुल 20 सीटें हैं, जिसमें से आधे से अधिक 14 सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की। दो सीटों पर आईयूएमएल, एक पर सीपीआई (मार्क्सवादी), एक पर केईसी और एक पर आरएसपी ने जीत हासिल की। दिलचस्प बात यह है कि केरल की एक सीट त्रिशूर (सुरेश गोपी) पर भाजपा ने जीत दर्ज करते हुए इस राज्य में अपना खाता खोला है।

मध्य प्रदेश में सभी 29 सीटों पर भगवाराज

2024 के आम चुनाव में भाजपा ने देश का दिल कहे जाने वाले राज्य मध्य प्रदेश में बेहतरीन प्रदर्शन किया और राज्य की सभी 29 सीटों पर जीत हासिल करते हुए क्लीन स्वीप किया। मौजूदा समय में यहां पर भाजपा की सरकार है और मोहन यादव मुख्यमंत्री हैं।

मध्य प्रदेश के बाद इसके समीपवर्ती राज्य महाराष्ट्र का रुख करते हैं, जहां पर लोकसभा की कुल 48 सीटों हैं। यहां पर कांग्रेस को 13, भाजपा को नौ, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) को नौ, एनसीपी (शरदपवार) को आठ, शिवसेना (एसएचएस) को सात, एनसीपी को एक सीट मिली है। जबकि एक सीट पर निर्दल प्रत्याशी को भी दिल्ली जाने का टिकट मिला है। दो लोकसभा सीटों वाले राज्य मणिपुर में कांग्रेस ने क्लीन स्वीप किया है। इसी तरह दो सीटों वाले मेघालय में एक सीट पर कांग्रेस तो दूसरी पर वीओटीपीपी प्रत्याशी की जीत हुई है।

22 सीटें जीत डीएमके बनी पांचवीं बड़ी पार्टी

राजस्थान में भी आधे से अधिक सीटों पर भाजपा को विजय मिली है। यहां पर कुल 25 सीटें हैं, जिसमें से 14 सीटों पर भाजपा, आठ सीटों पर कांग्रेस, एक सीट पर सीपीआई (मार्क्सवादी) और एक सीट पर आरएलटीपी प्रत्याशी को जीत हासिल हुई है।

एक सीट वाले राज्य सिक्किम में एसकेएम उम्मीदवार ने जीत हासिल की। सिक्किम के बाद दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु की बात करें तो यहां पर सर्वाधिक 22 सीटों पर डीएमके प्रत्याशियों ने कब्जा जमाया है। जबकि नौ पर कांग्रेस, दो पर वीसीके, दो पर सीपीआई (कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया), दो पर सीपीआई (मार्क्सवादी) और एक पर एमडीएमके को जीत का मौका मिला। तमिलनाडु में लोकसभा की कुल 39 सीटें हैं।

तेलंगाना में भाजपा और कांग्रेस का 50-50

17 लोकसभा सीटों वाले तेलंगाना में भाजपा और कांग्रेस ने 50-50 सीटों पर कब्जा जमाया है, जबकि एकमात्र सीट असदुद्दीन ओवैसी (एआईएमआईएम) के पास गई है। यहां से आठ सीटों पर भाजपा तो आठ पर कांग्रेस प्रत्याशियों की जीत हुई है।

अब नंबर आता है लोकसभा सीटों के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का। 80 सीटों वाले इस राज्य में भाजपा का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा। 2019 के चुनाव में भाजपा ने अकेले यूपी से 62 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार उसे 33 सीटों से संतोष करना पड़ा। जबकि समाजवादी पार्टी ने सर्वाधिक 37 सीटों और कांग्रेस ने छह सीटें जीतीं। पिछले चुनाव (2019) में सपा और कांग्रेस के खाते में सिर्फ छह सीटें आई थीं।

बंगाल में टीएमसी के खाते में गईं 29 सीटें

इसके अलावा उत्तर प्रदेश की दो सीटों पर राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) और एक सीट पर एएसपीकेआर (चंद्रशेखर वाली पार्टी) और एक पर अपना दल (एस) ने विजय पताका फहराई है। उत्तर प्रदेश के बाद समीपवर्ती राज्य उत्तराखंड की बात करें तो यहां की सभी पांच सीटों पर भाजपा ने क्लीन स्वीप किया है।

और अंत में पश्चिम बंगाल की बात। यहां पर लोकसभा की कुल 42 सीटें हैं। सीटों के लिहाज से यह टाप फाइव राज्यों में है। यहां पर भाजपा को अपेक्षा के अनरूप परिणाम नहीं मिला और 29 सीटों पर ममता बनर्जी की टीएमसी ने जीत हासिल की। भाजपा को 12 और कांग्रेस को एक सीट पर जीत हासिल हुई।

बंगाल में लड़ाई तो उत्तर प्रदेश में मेल-मिलाप

गौरतलब है कि टीएमसी ने उत्तर प्रदेश के भदोही लोकसभा सीट पर अपना प्रत्याशी (ललितेशपति त्रिपाठी) को उतारा था, लेकिन टीएमसी को भाजपा ने पराजित कर दिया। दिलचस्प यह है कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी और कांग्रेस ने एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा तो उत्तर प्रदेश में कांग्रेस, टीएमसी साथ नजर आई। 2024 के चुनाव में नरेंद्र मोदी को हराने के लिए बने इंडी गठबंधन में शामिल दलों के द्वारा देश के कई राज्यों में एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा गया। गठबंधन का यह विकृत स्वरूप भले ही मतदाता न समझ पाया हो, पर इस गठबंधन ने भाजपा को पूर्ण बहुमत से रोक ही दिया।

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